उठो ! अब गहरी नींद और नहीं सोना है।
भारत का सच वही है जो आस पास दिखाई दे रहा है।
गंगा, गाय, वन, पर्वत, परिवार, स्वास्थ्य, बच्चे , बुजुर्ग, सब लढ़ाई में हैं। बहुत परिवार, कर्ज के जाल में फंसे हैं। ग्रामीण मां बाप, बच्चों के पलायन को मजबूरी मान चुके हैं। स्वास्थ्य और शिक्षा का खर्च बोझ गया है। उस पर युवाओं की बेरोजगारी, भयावह है। खेत रसायन से भरते जा रहे हैं, गाय और बहुत जीव अंत की ओर जा रहे हैं। नदियों, वनों, ऋतुओं, जैव विवधता पर बनी यह भारत सभ्यता में लोग कभी ऐसी व्यवस्था में नहीं रहे।
राक्षस ने माया व छल से एक पुरुस्कृत वर्ग खढ़ा कर दिया है, और भारत बहिष्कृत होकर लूटा जा रहा है।
शोषणकारी शक्तियां बहुत संगठित, भटकाने वाली , व सभ्यतागत ध्वस्तिकरण को करने वाली हैं।
यह धर्म युद्ध भारत के आज के नागरिकों के सामने आ गया है।
इसलिये भारत के उदय व बचाव के लिये यह धर्म युद्ध हरेक को लढ़ना पड़ेगा, अपने लिये नहीं बल्कि अगली और आने वाली पीढ़ियों के लिये, नदियों, वन, गाय, देवराई, ग्राम, ग्राम देवता, वैद्य, गुरुओं, संतों, महिलाओं, परिवार सबके लिये। जटायू, गिलहरी, नल नील, जो भूमिका प्रदत्त है, करनी होगी।
भारत स्वराज मोर्चा, इसी उद्देश्य के लिये है।
क्या आप इस संकल्प के लिये तैयार हैं ?
" हम, भारत की व्यवस्था का नव निर्माण करेंगे, जिससे भारत इस वैव्श्रिक शोषण जाल से निकलकर अपनी नियति को साकार करे। "
भारत स्वराज मोर्चे के उद्देश्य –
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सज्जन शक्ति को जोड़ना और सबके प्रयास को बल देना
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समाज के विभिन्न वर्ग के प्रतिनिधि – उनकी मांग को समाहित कर मोर्चे में लाना
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मोर्चा के व्यवस्था परिवर्तन के अभियान, व इससे जुढ़े संगठनात्मक कार्य
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10,000 नेताओं को (विविध वर्ग, क्षेत्र, कार्य से) सभ्यतागत स्तर से गांव स्तर तक नेतृत्व के लिये तैयार करना।
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जब तक सही व्यवस्था नहीं बने, तब तक देश में शोषित संपदा व वर्ग के चल रहे अभियान को बल देना , जैसे गौ पालकों, वैद्यों, संतों, वनवासी, हिमाल को संरक्षण व सत्ता में साथ, रिटायर्ड सिपाही की मांगें ; गाय , वन, गंगा को संरक्षण , इत्यादि
भारतीय नव-व्यवस्था अभियान
* डिजिटल नागरिकता ढांचा
* स्थानीय को प्राथमिकता
* मुद्राराक्षस से मुद्रादेव
* विकेन्द्रित स्थानीय तंत्र , पंचायती राज असल रूप
* सत्ता में संत व समाज
* शिक्षा व स्वास्थ्य व्यवस्था में जन भागीदारी व समानता
* युवा को भविष्य मानकर सक्षम बनाना व बेरोजगारी से सुरक्षा
क्या आपको यह अहसास होने लगा है कि –
– इस व्यवस्था में नदियां, पर्वत, वन , पानी, हवा, गाय, परिवार, स्वास्थ्य, इत्यादि भारत के जीवन तत्व ही क्षीण होते जा रहे हैं
– एक वर्ग पुरुस्कृत भारत बनकर , व्यवस्था अपने अनुसार बुनता जाता है और भारत ( किसान, वैद्य, लघु उद्योग, स्थानीय व्यवसाय, नदियां, पर्वत, वन , पानी, हवा, गाय, परिवार, स्वास्थ्य, इत्यादि ) को बहिष्कृत व शोषित कर हाशिए पर ढकेल रहा है।
– परिवारों का तनाव, झगड़े, खर्च , यह सब भारत की संस्कृति की ही नष्ट कर देगा
– old age home, shelter, पाखंड, शोर, यह सब समाधान नहीं है
– मुद्रा, कानून , तकनीक का मुंह व ढांचा ऐसा बनाया है कि भारत लुट जाये
– युवा पीढी , बेरोजगारी और अनुपयोगिता से कमजोर होती जा रही है
– मठ, संगठन, परिवार तक पैसे से संचालित होते जा रहे हैं?
अपना विचार भी दें – Click here
यदि एक भी बिंदु पर आप सहमत हैं तो आगे बढ़ें।
भारत स्वराज मोर्चे के संसाधन व सहायता:
मोर्चे का कोई पंजीयन या नामकरण नहीं हैं। न कोई बैंक या अन्यथा अकाउंट है।
मोर्चा या इससे जुड़ा व्यक्ति , किसी से मोर्चे के लिये पैसा नहीं लेगा।
हमारे स्थान , जुड़े हुए व्यक्तियों के खेत, घर, गांव मोहल्ले के चौपाल, आदि हैं। हर व्यक्ति अपने आवा जाही की व्यवस्था स्वयं ही करता है।
बड़े शिविर में दो चार लोग या फिर पूरा आया समूह साझा रूप से अपनी व्यवस्था का खर्च उठा लेता है।
सहायता:
यदि आप साधन संपन्न हैं और इस प्रयास में धन से मदद करना चाहते हैं तो किसी शिविर में खान पान का खर्च उठा सकते हैं।
या फिर किसी व्यक्ति को उसके आवागमन के टिकट दिलवा सकते हैं।
यह सब सीधे व्यक्तिगत से व्यक्तिगत समझ पर है।
इससे ज्यादा संसाधन और सहायता का सवाल ही नहीं है। यह सूत्र हमारी अनेकों गहरे साथियों के भारत की समझ व पग पग पर कुटुम्ब पर आधारित है।